51. GAAP, लेखांकन अवधारणाएँ एवं लेखांकन मानक
GAAP, Accounting Concepts & Accounting Standardsमूल मुख्य बिंदु
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लेखांकन — AAA (1966): आर्थिक सूचनाओं की पहचान, माप और संप्रेषण। AICPA: धन के संदर्भ में लेन-देनों और घटनाओं को रिकॉर्ड, वर्गीकृत और सारांशित करने की कला।
- 2
GAAP वित्तीय लेखांकन और रिपोर्टिंग के लिए दिशानिर्देशों का मानक ढाँचा है। भारत में GAAP ICAI (चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम 1949) द्वारा शासित। इसमें: (a) लेखांकन अवधारणाएँ, (b) लेखांकन परंपराएँ, (c) लेखांकन मानक शामिल हैं।
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चालू व्यापार अवधारणा: यह मानती है कि व्यवसाय भविष्य में (सामान्यतः कम से कम 12 माह) चलता रहेगा। इसी आधार पर स्थायी संपत्तियों को लागत मूल्य पर दर्ज किया जाता है और मूल्यह्रास उनकी उपयोगी आयु में बाँटा जाता है।
- 4
उपार्जन/मिलान अवधारणा: राजस्व तब माना जाता है जब वह अर्जित हो (नकद मिलने पर नहीं); व्यय तब दर्ज होता है जब वह हुआ हो (नकद भुगतान पर नहीं)। इससे यह पक्का होता है कि एक ही लेखा अवधि में राजस्व और व्यय का मिलान हो।
- 5
निरंतरता अवधारणा: एक लेखा अवधि से दूसरी में वही लेखांकन विधियाँ लागू होनी चाहिए। यदि बदलाव हो तो प्रकटीकरण और वित्तीय प्रभाव अनिवार्य है। उदाहरण: यदि SLM मूल्यह्रास वर्ष 1 में अपनाया, तो वर्ष 2 में भी वही विधि।
- 6
विवेक (रूढ़िवाद) अवधारणा: संभावित हानियों को पहले से दर्ज करो लेकिन अनर्जित लाभ मत दर्ज करो। "संभावित लाभों की अपेक्षा मत करो, सभी हानियों के लिए प्रावधान करो।" उदाहरण: संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान बनाना; अदत्त ख्याति नहीं दर्ज करना।
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व्यावसायिक इकाई अवधारणा: व्यवसाय को उसके स्वामी से अलग माना जाता है। स्वामी के व्यक्तिगत लेन-देन व्यवसाय की पुस्तकों में नहीं आते। स्वामी की पूँजी व्यवसाय की देयता है। यह दोहरी प्रविष्टि प्रणाली का आधार है।
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द्वि-पक्षीय अवधारणा: प्रत्येक लेन-देन के दो पक्ष — डेबिट और क्रेडिट। संपत्तियाँ = देयताएँ + स्वामी की इक्विटी। दोहरी प्रविष्टि प्रणाली का श्रेय लुका पचिओली (1494, सुम्मा दे अरिथमेटिका) को जाता है।
- 9
महत्त्वशीलता अवधारणा: वह मद महत्त्वपूर्ण है जिसका छोड़ना या गलत विवरण उपयोगकर्ताओं के निर्णयों को प्रभावित करे। अमहत्त्वपूर्ण मदों को समूहीकृत किया जा सकता है। सामान्यतः शुद्ध लाभ या कुल संपत्ति के 5-10% से अधिक मद को महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
- 10
भारत में लेखांकन मानक: ICAI ने 32 भारतीय लेखांकन मानक (AS 1–32) तैयार किए। सूचीबद्ध कंपनियों के लिए Ind AS — IFRS के साथ अभिसरण — MCA द्वारा अप्रैल 2016 से अनिवार्य।
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IFRS — IASB (2001, लंदन) द्वारा जारी; 144 देशों में अपनाया गया। IFRS सिद्धांत-आधारित है; US GAAP नियम-आधारित। भारत का Ind AS IFRS के साथ अभिसरित है, समान नहीं।
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मूल्यह्रास: मूर्त संपत्ति की लागत को उसकी उपयोगी आयु में व्यवस्थित रूप से बाँटना। प्रमुख विधियाँ: (क) सीधी रेखा विधि (SLM) — हर वर्ष समान राशि; (ख) लिखित-घटित मूल्य विधि (WDV) — पुस्तक मूल्य पर निश्चित प्रतिशत; (ग) उत्पादन इकाई विधि — वास्तविक उपयोग के आधार पर। कंपनी अधिनियम 2013 की अनुसूची II संपत्तियों की उपयोगी आयु निर्धारित करती है।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M GAAP क्या है? इसके मुख्य घटक क्या हैं?
आदर्श उत्तर
GAAP वित्तीय लेखांकन का मानक ढाँचा है। तीन घटक: (1) अवधारणाएँ — चालू व्यापार, उपार्जन, व्यावसायिक इकाई; (2) परंपराएँ — विवेक, संगति, भौतिकता; (3) मानक — गैर-सूचीबद्ध के लिए AS 1–32; सूचीबद्ध फर्मों के लिए Ind AS (IFRS-संरेखित, अप्रैल 2016 से)। भारत का GAAP ICAI (स्थापित 1949, सनदी लेखाकार अधिनियम) द्वारा संचालित होता है।
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