सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
एकल परिवार शहरी क्षेत्रों में भारत का प्रमुख घरेलू प्रकार बन गया है: सभी परिवारों का 54.4% (जनगणना 2011) एकल परिवार हैं। संयुक्त परिवार (बहु-पीढ़ी, पितृसत्तात्मक) नगरीकरण, आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के कारण घट रहा है।
भारत में विवाह: 93% विवाह व्यवस्थित हैं (IHDS 2011–12); अंतर-जातीय विवाह मात्र 5.4% (IHDS) पर बहुत कम हैं। विशेष विवाह अधिनियम, 1954 जाति/धर्म की परवाह किए बिना सिविल विवाह की अनुमति देता है। बाल विवाह (निषेध) अधिनियम, 2006 न्यूनतम आयु निर्धारित करता है: महिलाएं 18 वर्ष, पुरुष 21 वर्ष; बाल विवाह प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 महिलाओं की आयु बढ़ाकर 21 करने का प्रस्ताव करता है।
भारत में वृद्धजन: 138 मिलियन व्यक्ति 60+ आयु (2021); 2050 तक 346 मिलियन का अनुमान (UNFPA India Ageing Report 2023)। वृद्ध दुर्व्यवहार — नीति आयोग 2020 रिपोर्ट: 20% वृद्ध किसी न किसी रूप में दुर्व्यवहार का सामना करते हैं। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (संशोधित 2019): बच्चे/संबंधी ₹10,000/माह तक भरण-पोषण देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं; परित्यक्त वरिष्ठ संपत्ति वापस पाने के हकदार हैं।
दिव्यांगजन (PwD): 2.68 करोड़ दिव्यांग व्यक्ति (जनगणना 2011) = जनसंख्या का 2.21%। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD): दिव्यांगजन अधिनियम, 1995 को प्रतिस्थापित किया; 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता (7 से बढ़ाकर); सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण (3% से बढ़ाकर); शिक्षा, रोजगार, सुगम्यता का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
भारत में साइबर अपराध: NCRB 2022 डेटा: 65,893 साइबर अपराध मामले दर्ज — अब तक सर्वाधिक; 2021 की तुलना में 24.4% वृद्धि। शीर्ष श्रेणियां: OTP धोखाधड़ी, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, सोशल मीडिया अपराध, साइबर पीछा। IT अधिनियम, 2000 (संशोधित 2008): धारा 66A (2015 में निरस्त — Shreya Singhal केस), 66C (पहचान की चोरी), 66D (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 67 (अश्लील सामग्री), 70 (हैकिंग)।
भारत में सोशल मीडिया: 467 मिलियन सोशल मीडिया उपयोगकर्ता (जनवरी 2023); YouTube = 467 mn उपयोगकर्ता, WhatsApp = 487 mn, Facebook = 314 mn, Instagram = 229 mn। IT (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियम, 2021: शिकायत अधिकारी, संदेशों के प्रथम प्रेषक की पहचान, विशिष्ट सामग्री की 24 घंटे में हटाने की बाध्यता।
शारदा अधिनियम (बाल विवाह अवरोध अधिनियम, 1929) — बाल विवाह रोकने वाला पहला भारतीय कानून; राय साहिब हर बिलास सारदा (राजस्थान विधायक, अजमेर) द्वारा प्रस्तुत। न्यूनतम आयु निर्धारित: लड़कियां 14, लड़के 18। RPSC 2021 ने इस पर 2-अंक का प्रश्न पूछा। महत्त्व: विवाह से संबंधित व्यक्तिगत/धार्मिक मामले में पहली राज्य हस्तक्षेप।
सोशल मीडिया और फेक न्यूज: WhatsApp मॉब लिंचिंग — 2018: कम से कम 33 मॉब लिंचिंग मौतें वायरल फर्जी WhatsApp संदेशों (बच्चा अपहरण अफवाहें) से जुड़ी। सर्वोच्च न्यायालय ने Tehseen S. Poonawalla v. Union of India (2018) में मॉब लिंचिंग के विरुद्ध कानून बनाने का निर्देश दिया — अभी लंबित। डिजिटल विभाजन: 2022 तक, इंटरनेट पहुंच: शहरी 67% बनाम ग्रामीण 34% (TRAI)।
Hindu Undivided Family (HUF) और परिवर्तित परिवार कानून: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (संशोधित 2005) ने बेटियों को HUF पैतृक संपत्ति में समान सहदायिकी अधिकार दिए — पितृवंशीय उत्तराधिकार से एक महत्वपूर्ण बदलाव। 2005 का संशोधन (SC द्वारा Vineeta Sharma v. Rakesh Sharma, 2020 में पूर्वव्यापी रूप से पुष्टि) तब भी लागू होता है जब पिता 2005 से पहले मर गए हों। यह सुधार पितृसत्तात्मक संयुक्त परिवार मॉडल को सीधे चुनौती देता है।
दिव्यांगजन — समावेश बनाम एकीकरण: RPwD अधिनियम, 2016 दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRPD, 2006) के ढांचे को अपनाता है — दान/चिकित्सा मॉडल से अधिकार-आधारित सामाजिक मॉडल की ओर। सुगम्य भारत अभियान (सुगम्य भारत अभियान, 2015) सार्वजनिक भवनों, परिवहन और डिजिटल संसाधनों में सुगम्यता का लक्ष्य रखता है। दिव्यांगजन शब्द (PM Modi द्वारा 2015 में गढ़ा) दिव्यांगता को दैवीय उपहार के रूप में पुनर्परिभाषित करता है। ADIP योजना BPL दिव्यांगजन को निःशुल्क सहायक उपकरण प्रदान करती है।
समान नागरिक संहिता (UCC) और परिवार कानून सुधार: संविधान का अनुच्छेद 44 (राज्य नीति के निदेशक तत्त्व) समान नागरिक संहिता अनिवार्य करता है — सभी नागरिकों पर लागू होने वाला एकल परिवार कानून (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण)। वर्तमान में भारत में हिंदुओं (हिंदू विवाह अधिनियम, 1955), मुसलमानों (मुस्लिम वैयक्तिक विधि), ईसाइयों (भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872) के लिए अलग व्यक्तिगत कानून हैं। उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य (2024) बना।
महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराध — कानूनी ढांचा: IPC की धारा 354A से 354D (2013 में जोड़ी गई) — यौन उत्पीड़न, हमला, ताक-झांक और पीछा (साइबर पीछा सहित)। IT अधिनियम धारा 66E — निजी छवियों को सहमति के बिना कैप्चर/प्रसारित करना। POCSO अधिनियम, 2012 नाबालिगों के ऑनलाइन यौन शोषण को कवर करता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) MHA द्वारा ऑनलाइन रिपोर्टिंग के लिए। राजस्थान में 2023 से सभी जिलों में साइबर पुलिस थाने।
