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समाज, प्रबंधन एवं लेखाशास्त्र

मुख्य बिंदु

धर्मनिरपेक्षीकरण, नगरीकरण, आधुनिकीकरण, वैश्वीकरण

पेपर I · इकाई 3 अनुभाग 1 / 11 PYQ-शैली 22 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु

  1. धर्मनिरपेक्षीकरण (Peter Berger) वह प्रक्रिया है जिसके तहत धर्म का व्यक्तिगत व्यवहार, सामाजिक संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन पर प्रभाव कम होता जाता है; धार्मिक सत्ता का स्थान तर्कसंगत, वैज्ञानिक व्याख्याएँ ले लेती हैं। भारत संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष मॉडल का अनुसरण करता है — राज्य न किसी धर्म को बढ़ावा देता है और न किसी से भेदभाव करता है (अनुच्छेद 25-28)।

  2. भारत में नगरीकरण: शहरी जनसंख्या 17.3% (1951) से बढ़कर 31.1% (Census 2011) हो गई; 2030 तक 40% का अनुमान है। 2023 तक भारत में 4,041 वैधानिक नगर, 3,784 जनगणना नगर, तथा 53 महानगरीय क्षेत्र (जनसंख्या >= 10 लाख) हैं।

  3. आधुनिकीकरण (S.N. Eisenstadt, 1966) पारंपरिक समाजों के बहुआयामी रूपांतरण को संदर्भित करता है — संरचनात्मक विभेदीकरण, लोकतंत्रीकरण, नगरीकरण, औद्योगिकीकरण, धर्मनिरपेक्षीकरण, तर्कसंगतीकरण — जो आधुनिक मूल्यों और प्रौद्योगिकी के प्रसार द्वारा संचालित होती है।

  4. वैश्वीकरण विश्वव्यापी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों का सघनीकरण है। WTO (1995) और उदारीकरण (1991, भारत) इसके संस्थागत चालक हैं। भारत का माल व्यापार-GDP अनुपात 14% (1990) से बढ़कर 42% (2022) हो गया, जो गहरे एकीकरण को दर्शाता है।

  5. Arjun Appadurai के 5 सांस्कृतिक प्रवाह (Modernity at Large, 1996): एथ्नोस्केप्स (लोगों की आवाजाही), मीडियास्केप्स (मीडिया छवियाँ), टेक्नोस्केप्स (प्रौद्योगिकी), फाइनेंसस्केप्स (पूँजी), आइडियोस्केप्स (विचारधाराएँ)। ये असंगत प्रवाह एक जटिल, असमान वैश्विक संस्कृति का निर्माण करते हैं — न कि एकाश्मीय "अमेरिकीकरण।"

  6. पश्चिमामोह (घर्बज़देगी) — ईरानी दार्शनिक Jalal Al-e-Ahmad (1962) द्वारा प्रतिपादित; गैर-पश्चिमी समाजों द्वारा पश्चिमी उपभोक्ता संस्कृति और मूल्यों को अत्यधिक अपनाने की स्थिति को दर्शाता है, जिसमें स्वदेशी पहचान खो जाती है। RPSC 2023 में इस पर 2-अंकीय प्रश्न पूछा गया था।

  7. वैश्विक ग्रामMarshall McLuhan (1962) की अवधारणा: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (TV, रेडियो, इंटरनेट) ने समय-स्थान को संकुचित कर दिया है, जिससे पूरा विश्व एक समुदाय की तरह कार्य करता है — लोग एक साथ वैश्विक घटनाओं में भागीदार बनते हैं। RPSC 2021 में इस पर 2-अंकीय प्रश्न पूछा गया था।

  8. भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा प्रस्तावना में "धर्मनिरपेक्ष" शब्द जोड़ा गया। भारत की धर्मनिरपेक्षता = सर्वधर्म सम्भाव (सभी धर्मों का समान सम्मान), न कि पश्चिमी चर्च-राज्य पृथक्करण। अनुच्छेद 25 (विवेक की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थाएँ), अनुच्छेद 27 (धर्म के लिए कर नहीं), अनुच्छेद 28 (राज्य-वित्त पोषित विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा नहीं)।

  9. नगरीकरण और झुग्गी-बस्तियाँ: भारत की शहरी वृद्धि ने गंभीर असमानताएँ उत्पन्न की हैं — 17.4% शहरी परिवार झुग्गियों में रहते हैं (Census 2011); मुंबई की धारावी (~10 लाख लोग, 2.1 वर्ग किमी) एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U, 2015) सभी शहरी गरीबों के लिए आवास का लक्ष्य रखती है। शहरी प्रवासी "तैरती आबादी" बनाते हैं — न पूर्णतः ग्रामीण, न शहरी — चक्राकार प्रवासन और अर्ध-नगरीकरण की नई श्रेणियाँ उत्पन्न होती हैं।

  10. आधुनिकीकरण और इसके आलोचक — निर्भरता सिद्धांत: Andre Gunder Frank (1967) का तर्क था कि पश्चिमी आधुनिकीकरण सिद्धांत वैचारिक है — यह इस बात की अनदेखी करता है कि औपनिवेशिक और नव-औपनिवेशिक संरचनाएँ विकासशील राष्ट्रों को अल्पविकास की स्थिति में बनाए रखती हैं। भारत का अनुभव आंशिक आधुनिकीकरण दर्शाता है: शहरी अभिजात वर्ग प्रथम-विश्व उपभोग पैटर्न का अनुभव करते हैं, जबकि ग्रामीण/जनजातीय आबादी पारंपरिक सामाजिक संरचनाएँ बनाए रखती है। यह द्वि-अर्थव्यवस्था आलोचना RPSC के भारत-विशिष्ट आधुनिकीकरण प्रश्नों के लिए प्रासंगिक है।

  11. Glocalization — समाजशास्त्री Roland Robertson (1992) की अवधारणा: वैश्वीकरण एकसमान वैश्विक संस्कृति नहीं उत्पन्न करता; बल्कि वैश्विक प्रक्रियाएँ स्थानीय संस्कृतियों द्वारा अनुकूलित होती हैं, जिससे संकर परिणाम निकलते हैं। उदाहरण: भारतीय फास्ट फूड (McDonald's India में McAloo Tikki), बॉलीवुड द्वारा हॉलीवुड शैली का समावेश, योग का वैश्विक फिटनेस अभ्यास बनना।

  12. राजस्थान में नगरीकरण: राजस्थान की शहरी जनसंख्या 23.4% (2001) से बढ़कर 24.9% (Census 2011) हुई — राष्ट्रीय औसत 31.1% से कम, जो राज्य की मुख्यतः कृषि-प्रधान प्रकृति दर्शाता है। जयपुर एकमात्र महानगर है (30.7 लाख, 2011); राज्य में 184 शहरी स्थानीय निकाय हैं। जयपुर-दिल्ली गलियारे और जोधपुर के आसपास तीव्र नगरीकरण औद्योगिक वृद्धि और प्रवासन को दर्शाता है। मरुस्थलीकरण और सूखा शहरी क्षेत्रों में संकट-प्रवासन को गति देते हैं।