मुख्य बिंदु

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    दिल्ली सल्तनत को 1206 से 1526 तक राजवंशीय सुदृढ़ीकरण, सैन्य केंद्रीकरण और कृषि-राजस्व व्यवस्था के क्रम में पढ़ना चाहिए।

  2. 2

    राजस्थान-रेखा तराइन में पृथ्वीराज चौहान, अलाउद्दीन खिलजी के समय चित्तौड़, और खानवा में राणा सांगा से जुड़ती है।

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    इल्तुतमिश ने इक्ता प्रशासन और सिक्कों से सल्तनत को स्थिर किया; बलबन ने तुर्क अमीरों के विरुद्ध राजसत्ता को कठोर बनाया।

  4. 4

    अलाउद्दीन खिलजी का बाजार नियंत्रण, 50 प्रतिशत भूमि-राजस्व और स्थायी सेना मंगोल-रक्षा तथा डेक्कन विस्तार दोनों समझाते हैं।

  5. 5

    मुहम्मद बिन तुग़लक़ की राजधानी-स्थानांतरण और सांकेतिक मुद्रा कमजोर क्रियान्वयन वाली जोखिमपूर्ण नीति दिखाती है।

  6. 6

    1526 में पानीपत में लोदी पराजय और 1527 में खानवा में राणा सांगा की पराजय ने मुगल-राजपूत चरण खोला।

  7. 7

    विजयनगर 1336 में शुरू हुआ और तुलुव राजवंश के कृष्णदेव राय के अधीन साहित्यिक-राजनीतिक शिखर पर पहुंचा।

  8. 8

    1565 का तालिकोटा हम्पी को तोड़ गया और विजयनगर प्रभुत्व समाप्त हुआ, हालांकि अराविदु रेखा हम्पी से बाहर बची रही।

तराइन से ऐबक: तुर्क शक्ति का प्रवेश

तराइन का दूसरा युद्ध 1192 में अजमेर-दिल्ली के चाहमान शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय और मुइज़ुद्दीन मुहम्मद गौरी के बीच करनाल क्षेत्र के तरावड़ी के पास हुआ। 1191 में गौरी रुक गया था, पर 1192 में उसकी घुड़सवार धनुर्धारी शक्ति और बदली हुई सैन्य रचना ने राजपूत पंक्ति तोड़ दी; पृथ्वीराज पकड़े गए और दिल्ली-अजमेर क्षेत्र का पुराना राजनीतिक संतुलन टूट गया। राजस्थान के लिए यह दूर की घटना नहीं है: अजमेर, सांभर और चाहमान स्मृति राज्य की मध्यकालीन पहचान से जुड़ी है, और बाद की राजस्थानी परंपराएं पृथ्वीराज को तुर्क प्रभुत्व से पहले का अंतिम वीर-चिह्न मानती हैं। गौरी की विजय के बाद क़ुतुबुद्दीन ऐबक (मामलूक राजवंश के संस्थापक) ने जीते हुए प्रदेशों को गौरी के दास-सेनापति के रूप में संभाला और 1206 में गौरी की मृत्यु के बाद शासक बना। 1206-1210 का उसका छोटा शासन दिल्ली सल्तनत के मामलूक या गुलाम राजवंश की शुरुआत था। ऐबक का शासन गहरी नौकरशाही से अधिक सैन्य नियंत्रण पर आधारित था: लाहौर, दिल्ली और गंगा-यमुना दोआब सेनापतियों, किलों और कर से संभाले गए। उसने क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद बनवाई और क़ुतुब मीनार आरंभ की, जिसे बाद के शासकों ने बढ़ाया। राजस्थान से संबंध इसलिए भी बना रहा कि तुर्क दबाव केवल दिल्ली से नहीं, अजमेर, रणथंभौर और मेवाड़ मार्गों से भी गुजरा। नई व्यवस्था घुड़सवार सेना, फारसी लेखा-प्रणाली और छावनी नगरों पर टिकी थी। अजमेर पर नियंत्रण गुजरात मार्ग, सांभर नमक और मेवाड़ की दिशा के कारण महत्त्वपूर्ण था।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ इन घटनाओं को सही कालक्रम में रखिए: 1. विजयनगर की स्थापना 2. चित्तौड़ का 1303 संकट 3. 1526 का पानीपत 4. 1565 का डेक्कन युद्ध
  1. A क्रम 2-1-3-4 सही उत्तर
  2. B क्रम 1-2-3-4
  3. C क्रम 2-3-1-4
  4. D क्रम 1-2-4-3

व्याख्या

सही क्रम चित्तौड़ 1303, विजयनगर 1336, पानीपत 1526 और तालिकोटा 1565 है। विकल्प क इसलिए सही है। विकल्प ख विजयनगर को खिलजी के चित्तौड़ आक्रमण से पहले रखता है। विकल्प ग पानीपत को विजयनगर से पहले ले जाता है। विकल्प घ तालिकोटा और पानीपत को उलट देता है।