मुख्य बिंदु

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    मौद्रिक नीति में आरबीआई, मौद्रिक नीति समिति, रेपो दर, तरलता गलियारा और आरक्षित अनुपात मुख्य हैं।

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    राजकोषीय नीति में केंद्र और राज्य बजट कर, व्यय, उधारी और अंतरण से मांग को प्रभावित करते हैं।

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    उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति लक्ष्य 4 प्रतिशत है और सहनशीलता पट्टी 2 से 6 प्रतिशत है।

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    एफआरबीएम अनुशासन राजकोषीय घाटे, सरकारी ऋण और बजट के साथ रखे जाने वाले पारदर्शिता-विवरणों को जोड़ता है।

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    जीएसटी, कर उछाल, वित्त आयोग अंतरण और योजना-वित्तपोषण केंद्र-राज्य राजकोषीय मार्ग बनाते हैं।

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    राजस्थान का संबंध घाटा अनुपात, ऋण भार, ऊर्जा निवेश और कर-अंतरण हिस्सेदारी से बनता है।

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    रेपो, उल्टी रेपो, स्थायी जमा सुविधा, एमएसएफ, सीआरआर, एसएलआर और ओएमओ का प्रभाव अलग-अलग है।

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    राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा और प्राथमिक घाटा उधारी जरूरत के अलग-अलग हिस्से मापते हैं।

नीति-मानचित्र और रेपो दर चक्र

मौद्रिक और राजकोषीय नीति व्यापक आर्थिक स्थिरीकरण की दो अलग भुजाएं हैं। मौद्रिक नीति धन की कीमत और मात्रा को भारतीय रिज़र्व बैंक के माध्यम से बदलती है, जबकि राजकोषीय नीति कर, सार्वजनिक व्यय और उधारी को निर्वाचित सरकारों के बजट से बदलती है। दर-कटौती अल्पकालीन नीति-संकेत घटाती है और कुछ अंतराल के बाद ऋण दरों को प्रभावित कर सकती है; अधिक राजकोषीय घाटा सरकारी उधारी बढ़ाता है और परिस्थिति के अनुसार मांग को सहारा दे सकता है या निजी ऋण को दबा सकता है। संस्थागत विभाजन साफ है: आरबीआई रेपो, उल्टी रेपो, स्थायी जमा सुविधा, एमएसएफ, सीआरआर, एसएलआर और ओएमओ का प्रयोग करता है; सरकारें कर, व्यय, सब्सिडी, उधारी, अंतरण और गारंटी का प्रयोग करती हैं।

आरबीआई रेपो दर (मौद्रिक नीति समिति 2024-25 चक्र) मौजूदा आधार है क्योंकि रेपो दर लंबे 6.50 प्रतिशत विराम के बाद 7 फरवरी 2025 को 6.25 प्रतिशत और 9 अप्रैल 2025 को 6.00 प्रतिशत हुई। अप्रैल 2025 निर्णय में स्थायी जमा सुविधा 5.75 प्रतिशत तथा एमएसएफ और बैंक दर 6.25 प्रतिशत रखे गए। इसलिए रेपो दर का तथ्य यह पूछता है कि ऋण कौन देता है, किस दर पर देता है, किस प्रतिभूति के विरुद्ध देता है और तरलता पर क्या प्रभाव पड़ता है। रेपो बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के विरुद्ध अल्पकालीन तरलता देता है; उल्टी रेपो बैंकों से तरलता खींचती है; स्थायी जमा सुविधा बिना प्रतिभूति के अधिशेष धन सोखती है।

राजस्थान में यही ढांचा उधारी लागत, बिजली क्षेत्र और आधारभूत ढांचे की परियोजनाओं में दिखता है। राजस्थान बजट 2025-26 ने राजकोषीय घाटा 84,643.63 करोड़ रुपये, अर्थात राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 4.25 प्रतिशत, अनुमानित किया। आरबीआई की नरमी ऋण-सेवा और परियोजना-वित्त की लागत घटा सकती है, पर राजकोषीय गणना को समाप्त नहीं करती। सौर, सड़क और जल ढांचे का विस्तार कर रहे राज्य के लिए रेपो चक्र बांड प्रतिफल, बैंक ऋण दर और सार्वजनिक ऋण की लागत से जुड़ता है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ एक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के विरुद्ध आरबीआई से नीति दर पर रातोंरात धन लेता है। यह कौन-सा उपकरण है?
  1. A रेपो दर परिचालन सही उत्तर
  2. B उल्टी रेपो अवशोषण
  3. C कर अंतरण
  4. D राजस्व घाटा

व्याख्या

रेपो परिचालन में आरबीआई पात्र प्रतिभूतियों के विरुद्ध बैंकों को धन देता है और सामान्यतः तरलता जोड़ता है। उल्टी रेपो और स्थायी जमा सुविधा धन सोखती हैं; कर अंतरण और राजस्व घाटा राजकोषीय नीति के विषय हैं।