मुख्य बिंदु

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    अरावली जल-विभाजक राजस्थान को बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और आंतरिक अपवाह तंत्रों में अलग करता है।

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    चंबल यमुना तंत्र की राजस्थान से जुड़ी सबसे बड़ी नदी है और गांधी सागर-कोटा शृंखला को आधार देती है।

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    बनास प्रमुख पूर्ण-राजस्थान नदी है और बीसलपुर बांध इसे पेयजल आपूर्ति से जोड़ता है।

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    लूनी पश्चिमी राजस्थान को समझाती है: मौसमी प्रवाह, लवणता, बाड़मेर-जालौर मार्ग और कच्छ की दिशा।

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    माही और साबरमती दक्षिणी राजस्थान को गुजरात और खंभात की खाड़ी से जोड़ने वाली पश्चिमवाहिनी प्रणालियाँ हैं।

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    घग्गर-हकरा हनुमानगढ़, कालीबंगा और सरस्वती परंपरा से जुड़ी क्षणिक उत्तरी नदी है।

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    सांभर, जयसमंद, पिछोला, फतेह सागर और राजसमंद भौतिक भूगोल को इतिहास और पर्यटन से जोड़ते हैं।

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    आर्द्रभूमि स्मरण में वर्तमान रामसर अभिलेख रखें, विशेषकर खीचन की 2025 सूचीबद्धता।

अरावली विभाजक और तीन अपवाह तंत्र

राजस्थान की नदियों को ऊँचाई और ढाल से पढ़ना चाहिए। अरावली शृंखला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में जल-विभाजक बनाती है। इसके पूर्व और दक्षिण-पूर्व में चंबल-बनास-काली सिंध-पार्वती तंत्र यमुना और बंगाल की खाड़ी की ओर जाता है, दक्षिण-पश्चिम में माही-साबरमती-लूनी तंत्र अरब सागर की ओर जाता है, और उत्तर-पश्चिम में कई धाराएँ आंतरिक बेसिन में समाप्त होती हैं। यही राजस्थान के तीन अपवाह तंत्र का व्यावहारिक अर्थ है। नदी और झील को साथ पढ़ना जरूरी है, क्योंकि विभाजक के पश्चिम में प्रवाह कमजोर होकर लवण मैदानों और बंद अवसादों में बदलता है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी भागों में नदियाँ घाटियाँ काटती हैं और बहुउद्देशीय परियोजनाओं को पानी देती हैं। बंगाल की खाड़ी तंत्र में चम्बल नदी (यमुना सहायक), बनास नदी (राजस्थान की सबसे लंबी पूर्ण-राजस्थानी नदी), काली सिंध एवं पार्वती (चंबल सहायक), बंगंगा, गंभीरी और मेज आती हैं। अरब सागर तंत्र में लूनी नदी (पश्चिमी राजस्थान), माही नदी और साबरमती नदी (राजस्थान उद्गम) आती हैं। आंतरिक अपवाह में घग्गर नदी (प्राचीन सरस्वती), कांटली, साबी, सोता-रूपारेल और मरुस्थलीय लवण झीलें आती हैं। उदयपुर-राजसमंद कई उद्गमों से, कोटा-बूंदी-बारां-झालावाड़ चंबल-हाड़ौती से, बांसवाड़ा-डूंगरपुर माही से और हनुमानगढ़ घग्गर-हकरा से पहचाने जाते हैं। यही विभाजक वर्षा-प्रतिक्रिया भी समझाता है: हाड़ौती की नदियाँ मानसून के बाद घाटियों में बहती हैं, जबकि पश्चिमी धाराएँ उथले तल, अस्थायी तालाब और लवण मैदान बनाती हैं। जिला मिलान भी आवश्यक है। इसी ढांचे में सांभर साल्ट झील, जयसमंद और बीसलपुर बांध (बनास नदी, टोंक) अपनी सही जगह लेते हैं।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ राजस्थान अपवाह वर्गीकरण में चंबल-बनास एक ओर, माही-साबरमती-लूनी दूसरी ओर और घग्गर-कांटली बंद बेसिनों में रखे जाते हैं। सही युग्म कौन-सा है?
  1. A चंबल-बनास: अरब सागर; माही-लूनी: बंगाल की खाड़ी; घग्गर: हिमालयी अपवाह
  2. B चंबल-बनास: आंतरिक अपवाह; माही-लूनी: बंगाल की खाड़ी; घग्गर: अरब सागर
  3. C चंबल-बनास: बंगाल की खाड़ी; माही-लूनी: अरब सागर; घग्गर: आंतरिक अपवाह सही उत्तर
  4. D चंबल-बनास: बंगाल की खाड़ी; माही-लूनी: आंतरिक अपवाह; घग्गर: अरब सागर

व्याख्या

चंबल और बनास यमुना-गंगा तंत्र से जुड़ती हैं, इसलिए वे बंगाल की खाड़ी अपवाह में आती हैं। माही, साबरमती और लूनी पश्चिमवाहिनी होकर अरब सागर पक्ष से जुड़ती हैं। घग्गर-हकरा और कांटली आंतरिक अपवाह में आती हैं, इसलिए क, ख और घ में कम से कम एक दिशा उलटी है।