मुख्य बिंदु

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    राजस्थान की कृषि दस कृषि-जलवायु क्षेत्रों का मानचित्र है, केवल मरुस्थलीय पैटर्न नहीं।

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    बाजरा, सरसों, ग्वार, मोटे अनाज और कुल तिलहन राजस्थान की सबसे मजबूत राष्ट्रीय फसल-रैंक बनाते हैं।

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    भूमि-उपयोग डेटा महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान के प्रतिवेदित क्षेत्र का आधे से अधिक भाग शुद्ध बोया गया क्षेत्र है।

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    हाड़ौती, चंबल कमांड और दक्षिणी पहाड़ियाँ दिखाती हैं कि जल, ढाल और फसल-चयन को साथ पढ़ना पड़ता है।

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    बागवानी, सूक्ष्म सिंचाई, फसल बीमा और जैविक खेती जोखिमपूर्ण खेती को प्रबंधित कृषि-तंत्र में बदलते हैं।

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    डेयरी सहकारिता, राजफेड और विनियमित मंडियाँ उत्पादन-भूगोल को ग्रामीण आय से जोड़ती हैं।

कृषि-जलवायु ढाँचा

राजस्थान की कृषि जलवायु, मिट्टी और धरातल से शुरू होती है। राजस्थान के दस कृषि-जलवायु क्षेत्र वर्षा, मिट्टी, स्थलाकृति और फसल-पद्धति के आधार पर राज्य को बाँटते हैं। जैसलमेर, बाड़मेर और बालोतरा वाला शुष्क पश्चिमी मैदान बाजरा, मोठ और तिल जैसी कठोर खरीफ फसलों पर निर्भर रहता है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ का सिंचित उत्तर-पश्चिमी मैदान कपास, ग्वार, गेहूँ और सरसों उगाता है क्योंकि नहर-जल फसल कैलेंडर बदल देता है। बीकानेर, जैसलमेर और चूरू के भाग अति-शुष्क आंशिक सिंचित क्षेत्र बनाते हैं, जहाँ बाजरा, मोठ और ग्वार पानी माँगने वाली फसलों से अधिक भरोसेमंद रहते हैं। जोधपुर, पाली और जालौर वाला लूणी बेसिन बाजरा, ग्वार, ज्वार और तिल को उन रबी फसलों से जोड़ता है जिन्हें कुएँ या तालाब सर्दी की नमी देते हैं। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान अलग है: भरतपुर, धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर बाढ़-प्रवण पूर्वी मैदान हैं, जबकि कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान बनाते हैं। राजस्थान की प्रमुख फसलें (खरीफ/रबी) इसलिए ऋतु से अलग नहीं पढ़ी जा सकतीं। खरीफ में बाजरा, मक्का, मूंगफली, कपास, ग्वार, दलहन और तिल आते हैं; रबी में गेहूँ, सरसों, जौ और चना आते हैं। जीरा, धनिया और मेथी जैसी नकदी और मसाला फसलें सूखे तथा सिंचित दोनों खंडों में मिलती हैं। उत्तर-पश्चिम का 61 प्रतिशत भाग मरुस्थलीय या अर्ध-मरुस्थलीय है, जबकि दक्षिण-पूर्व अधिक उपजाऊ है। यही तीखा अंतर बताता है कि यही राज्य सूखा-सहिष्णु बाजरा में आगे हो सकता है और चंबल कमांड में चावल भी उगा सकता है। यह ढाँचा गलत जिला-जोड़ी से बचाता है। गंगानगर-हनुमानगढ़ में नहर जल कपास और गेहूँ को सहारा देता है, जबकि नागौर-सीकर में बाजरा, सरसों, चना और दलहन अधिक स्वाभाविक हैं। बांसवाड़ा-डूंगरपुर अलग आर्द्र दक्षिणी परत जोड़ते हैं।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ शुष्क पश्चिमी मैदान में आने वाली जिला-जोड़ी कम वर्षा वाली खरीफ मिलेट खेती से जुड़ी है। कौन-सा उत्तर सही है?
  1. A जैसलमेर और बाड़मेर - शुष्क पश्चिमी मैदान सही उत्तर
  2. B कोटा और बूंदी - चंबल चावल पट्टी
  3. C भरतपुर और धौलपुर - बाढ़-प्रवण पूर्वी मैदान
  4. D बांसवाड़ा और डूंगरपुर - आर्द्र दक्षिणी पहाड़ियाँ

व्याख्या

जैसलमेर और बाड़मेर कम वर्षा वाले शुष्क पश्चिमी खेती क्षेत्र में आते हैं और बाजरा, मोठ तथा तिल से जुड़े हैं। कोटा और बूंदी दक्षिण-पूर्वी कमांड जिले हैं, इसलिए वे चावल और सोयाबीन से अधिक मेल खाते हैं। भरतपुर और धौलपुर बाढ़-प्रवण पूर्वी मैदान में आते हैं, शुष्क पश्चिम में नहीं। बांसवाड़ा और डूंगरपुर आर्द्र दक्षिणी पहाड़ी जिले हैं जिनकी फसल पारिस्थितिकी अलग है।