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व्यवहार एवं विधि

संपत्ति हस्तांतरण और अमान्यता

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 (धाराएँ 1–25)

पेपर III · इकाई 3 अनुभाग 6 / 15 PYQ-शैली 27 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संपत्ति हस्तांतरण और अमान्यता

5.1 मूल प्रावधान

धारा 23(1): यदि किसी वरिष्ठ नागरिक ने अपनी संपत्ति दान द्वारा या अन्यथा इस शर्त पर अंतरित की हो कि अंतरिती मूलभूत सुविधाएं एवं शारीरिक आवश्यकताएं प्रदान करेगा, और अंतरिती ऐसी सुविधाएं एवं आवश्यकताएं देने से इनकार करे या असफल हो — तो वह अंतरण प्रारंभ से ही (ab initio) शून्य माना जाएगा।

धारा 23(2): भरण-पोषण अधिकरण को अंतरण शून्य घोषित करने की शक्ति है।

5.2 यह प्रावधान क्रांतिकारी क्यों है

इस प्रावधान से पहले, जो माता-पिता भरण-पोषण की शर्त पर बच्चों को संपत्ति हस्तांतरित कर चुके थे, उनके पास बच्चों के वादे से मुकरने पर कोई प्रभावी कानूनी उपाय नहीं था:

  • सामान्य संविदा कानून से धीमा, महंगा सिविल न्यायालय का उपाय मिलता था
  • माता-पिता प्रायः उन्हीं बच्चों पर निर्भर थे जिन पर वे मुकदमा कर रहे थे

धारा 23 उन्हें त्वरित प्रशासनिक उपाय देती है — अधिकरण स्वयं अंतरण को शून्य घोषित कर सकता है, जिससे संपत्ति माता-पिता को वापस मिल जाती है।

5.3 धारा 23 लागू होने की शर्तें

  1. अंतरण वरिष्ठ नागरिक द्वारा किया गया था (किसी तीसरे पक्ष द्वारा नहीं)
  2. अंतरण दान द्वारा या अन्यथा था (यदि भरण-पोषण शर्त जुड़ी हो तो बिक्री, सेटलमेंट आदि भी शामिल)
  3. भरण-पोषण की शर्त स्पष्ट या निहित थी — अंतरिती ने अंतरणकर्ता की देखभाल का वचन दिया था
  4. अंतरिती ने मूलभूत सुविधाएं एवं आवश्यकताएं देने से इनकार किया या असफल रहा
  5. भरण-पोषण अधिकरण का क्षेत्राधिकार है — कार्यवाही प्रारंभ हुई है

न्यायिक व्याख्या: न्यायालयों ने धारा 23 की सख्त व्याख्या की है — हर दान को रद्द नहीं किया जा सकता। अंतरण व्यवस्था का हिस्सा भरण-पोषण की शर्त होनी चाहिए। बिना किसी भरण-पोषण शर्त के शुद्ध दान को धारा 23 के अंतर्गत रद्द नहीं किया जा सकता (हालांकि अन्य प्रावधान लागू हो सकते हैं)।